Mission and Vission

काम्येष्टी एक यज्ञ है मन की मनोकामना को पूर्ण करने वाला यज्ञ जिसमे मंत्रो के उच्चारण के सांथ यज्ञ में आहुति देने से इच्छित मनोकामना पूर्ण होती हे इसी प्रकार हमारा जीवन भी यज्ञ हे जिस में हम हमारे अच्छे बुरे कर्मो की आहुति देते है और हमें उन्ही कर्म रूपी मंत्रो की आहुति के अनुसार फल की प्राप्ति होती हे शृष्टि की रचना की रचना से अब तक सभी जीवो के सांथ मनुष्य ने भी अपने कर्मो के माध्यम से शृष्टि के इस महायज्ञ में अपना योगदान दिया है ईश्वर की बनाई सभी रचनाओं मे से मानव ईश्वर के द्वारा बनाई गई सबसे खूबसूरत रचना है जो खूबसूरती के सांथ ही बुद्धिमान भी है
इसी लिए ईश्वर ने भी अनेको अनेक बार मानव रूप में अवतार लिया है और प्रकृति की अनेक बार रक्षा की हे ईश्वर की कृपा से मानव ने अपने बुद्धि बल का उपयोग कर अपना वर्चस्व स्थापित किया हे और अपने ज्ञान के बुते समय समय पर किये गए कार्यो ,उपलब्धियों,संघर्षो आदि को लिखित रूप में लिपिबद्ध किया है जिस्का प्रत्यक्ष उदाहरण हमारे वेद ,पुराण,काव्य ,महाकाव्य,जीवनी आदि के माध्यम से सहेजा है हमारे युगादी पुरुष वेदव्यास ,वाल्मीकि, दधीचि ,शंकराचार्य ,पतंजलि आदि जैसे महापुरषो द्वारा लिखित कार्य नहीं किया गया होता तो सोचो क्या हम कभी भी श्री राम ,कृष्ण ,शंकर ,दुर्गा ,आदि पूजित देवी देवता नाग, किन्नर,पशु, पक्षी दैत्य ,दानव ,आदि को उनके नाम से पहचान पाते शायद नहीं और नाही इन सभी पर विश्वास कर पाते और नाही आनेवाली पीढ़ी को सिद्ध कर पाते हमारे धर्म संस्कृति के विषय में
आज मानव ने जीतनी भी उपलब्धि हासिल की है उन सभी उपलब्धियों का श्रेय हमारे पूर्वजो को जाता है हम्ने जो कुछ भी हासिल किया सब उन्ही की उपलब्धि और अनुभव के आधार से सिख कर हासिल किया है इसी लिए हमारा भी कर्तव्य बनता है की हम भी हमारी और हमारे पूर्वजो द्वारा किये कार्यो, उपलब्धियों, संघर्षो आदि को आने वाली पीढ़ी के लिए लिखित रूप में सहेजने का प्रयास करे ताकि आने वाली पीढ़ी को हमारे जीवन के संघर्षो और उपलब्धियों को जानने और समझने का अवसर मिले
पुरातन काल में श्रुति के माध्यम से वंशावली गौरवगांथा ,काल खंड ,वेद ,पुराण ,आदि का वर्णन एवं प्रचार प्रसार किया जाता था बाद में उसे लिखित रूप में सहेजा जाने लगा लेकिन २ से ३ हजार वर्ष पहले सामंत वाद ,विदेशी आक्रमण ,और विदेशी लोगोँ के हस्तक्षेप के कारण हमारी परम्परा में अवरोध उत्पन्न हुए हमारे इतिहास के अनेको साक्ष्य समाप्त होगये या समाप्त करदिये गए और हमारे धर्म,त्यौहार,रीती रिवाज़ , रहन सहन पर दुसरो के रीतिरिवाज थोप दिए गए
इस वजह से लालची और प्रलोभी लोगो ने अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए हमारे सनातन धर्म को तोड़ कर जात पात, रंग भेद, उच नीच में विभक्त कर दिया आज जो हमारा सनातन धर्म खंडित रूप में हे उसका मूल कारण पिछले सेकड़ो सालो से समाज को उचित ज्ञान नामिलने से है हमारी कई पीढ़ीयो का अज्ञानी होना ही हमारी सनातन सम्प्रदाय के पतन का कारण रहा है और इसी वजह से आज कोई हमसे हमारा पारिवारिक इतिहास पूछे तो हम हमारे पिता के विषय में भी ठीक से नहीं बता पाएंगे तो पारिवारिक इतिहास तो दूर की बात है
आज हम इतने व्यस्त हे की अपने बच्चों को आध्यात्म पूजन पाठ देवी देवता परम्परा तो दूर की बात है उन्से दो पल बात भी नहीं कर पाते और यही उनके और हमारे बिच की दुरी की मुख्य वजह बन गई हे और यदि ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब हमारी सनातन परम्परा समाप्त होजायेगी या किसी और धर्म में विलीन हो जाएगी
क्या हमारा हमारे सनातन धर्म के प्रति इतना भी कर्तव्य नहीं बचा की हम हमारे सनातन धर्म के विषय में अपनी युवा पीढ़ी को अवगत कराये क्या हमारा विश्वास इतना कमजोर होगया हे की हमें हमारे सनातन धर्म में  सच्चाई महसूस नहीं होती सनातन धर्म वो धर्म हे जिसे देख कर अनेको अनेक धर्म परम्पराओ का जन्म हुआ है
यह एक मात्र धर्म है जिसमे लिखीहुई ज्ञान की हर एक बात में सच्चाई हे जो वैज्ञानिक हे जिसमे धर्म के सांथ सांथ प्रकृति ,वनस्पति ,जिव जन्तुओ का विस्तृत वर्णन सम्मान के सांथ किया गया हे जिसमे चराचर जगत के सभी तत्वों का विस्तृत वर्णन हे ऐसे सनातन धर्म से लगाव तो रखते हे लेकिन उसे सहेजने का तनिक भी प्रयास नहीं कर सकते आज हमें ऐसे सनातन धर्म को सहेजने की आवश्यकता हे आज हमें दूसरे सम्प्रदायों से सिखने की आवश्यकता हे जो अपने बच्चों को आधुनिक शिक्षा के सांथ सांथ धार्मिक शिक्षा भी देते हे जिस्से उनके बच्चे उनके धर्म और परम्पराओ का सम्मान करते हे
आप आनेवाली पीढ़ी के लिए क्या छोड़ कर जाओगे पैसा ,गाड़ी, घर, रोजगार,और इन सभी के लिए आपके द्वारा किया गया त्याग, संघर्ष इन्हे कौन समझेगा उन्हें कैसे पता चलेगा की ये सब आप ने कैसे प्राप्तकिया जैसा की हम जानते है की मानव प्रवत्ति हे कितना भी अच्छा मिले संतुस्ट नहीं होते जो भी मिले विवेचना जरूर करते हे [आखिर आप ने हमारे लिए क्या किया जो किया वो तो सभी अपने बच्चो के लिए करते हे उसमे विशेष क्या हे ये सब तो हम भी कर लेंगे ] सोचो जब इसे जवाब हमें आगे पीछे सुनना ही हे तो क्यों न हम उन्हें सब प्रकार की सुविधा के सांथ सांथ हमारे संघर्ष और त्याग भी बताये ताकि उनके मन में किसी भी प्रकार के गलत विचार ना पनपे
हम हमारी मेहनत से सब कुछ खरीद सक्ते हे घर ,गाड़ी, रोजगार,मान सम्मान ,आदि लेकिन नहीं खरीद सकते तो बस बिताहुआ समय ,इतिहास क्यों की इतिहास तो समय के सांथ किये गए कार्यो से बनता हे और उसे सिर्फ लिखित रूप में ही सहेजा जा सकता हे और इसी सहेजने की व्यवस्था का एक रूप हे [गोत्र वंशावली ]जो हमें हमारे पूर्वजो से और उन्हें उनके पूर्वजो से प्राप्त हुआ
हमारे वेदों और ग्रन्थों के अनुसार शृष्टि की रचना परब्रह्मा ने की और उन्होंने शृष्टि का ज्ञान ऋषियों को दिया और ऋषियों से सभी मानवो को प्राप्त हुआ सारे जगत के प्राणियों का जन्म ब्रह्मा जी से शुरू होता हे ब्रह्मा जी से ऋषि ऋषि से मनु मनु के पुत्रो से सारि मानव श्रंखला बनी हे हमारे वेदो में कही भी उच नीच काळा गोरा रंग रूप जात पात के भेदो का उल्लेख नहीं फिर उची जाती नीची जाती कहा से आई ये सब स्वार्थी लोगो के द्वारा फैलाया गया भ्रम जाल हे जिनके कारन हमारी सनातन धर्म व्यवस्था खंडित हुई हे
वेदों में उल्लेख हे तो बस वर्ण व्यवस्था का जो मानव के बुद्धि विवेक और उसके द्वारा किये गए कार्यो पर निर्भर थी इस विषय पर हम बाद में चर्चा करेंगे अभी हम चर्चा करेंगे गोत्र की जिस्से ज्ञात होता हे हम कहा से हे हमारे ऋषि कोनसे हे हमारे पूर्वज कोन थे उनके कार्य क्या थे वो कैसे जीवन व्यतीत करते थे गोत्र से ही हमारे इतिहास के विषय में ज्ञात होता हे हमारी शादी ब्याह पूजन पाठ आदि सभी गोत्र पर निर्भर करते हे
अतः हमें हमारे गोत्र के माध्यम से हमारे जीवन के सभी पहलुओं को सहेजने की आवश्यकता हे और एक मात्र साधन हमारे सनातन धर्म को सहेजने का पहला पड़ाव भी

जय श्री कृष्णा
कामयेष्टि संस्था एवं अनिमेष सामाजिक उत्थान एवं प्रक्षिण समिति द्वारा नगर परिषद आकोदिया में रहवासियों को प्लास्टिक बोतल के उपयोगों के विषय मे बताया गया ।
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत टीम अनिमेष संस्था द्वारा करनावद में स्कूल के बच्चों को स्वच्छता की जानकारी दीगई जिसमें संस्था के सभी कार्यकर्ता उपस्थित रहे

अनिमेष संस्था द्वारा करनावद में कर्णेश्वर महादेव मंदिर में वाल्मिकी समाज के सदस्यों के साँथ मंदिर प्रांगण में सफाई अभियान चलाया गया।

टीम अनिमेष द्वारा नरसिंहगढ में महिलाओं को स्वच्छता एवं धार्मिक गतिविधियों से जुड़ने के लिये प्रेरित किया गया और शरीर को स्वस्थ रखने के लिये नियमित योग एवं व्यायाम की जानकारी दीगई।